लाइनें जिसमें छिपा जीवन का सार

आज एक  कविता पर पढ़ी जिसकी लाइनें तो सिर्फ चार ही थी पर उसमे जीवन का सार

छिपा हुआ था।  वो लाइनें इस प्रकार से थी  .....

चैन से जीने के लिए , चार रोटी और दो कपडे काफी है ,

पर , बेचैनी से जीने के लिए चार गाड़ी , दो बंगले और तीन फ्लेट भी कम है।

आदमी सुनता है मनभर , सुनने के बाद प्रवचन देता है टन भर ,

पर खुद ग्रहण करता है कण भर।

यही सत्य है पर इसे  कोई मानना नहीं चाहता।  ये जीवन तो उस बुलबुले  तरह है  कि हवा चली

और बुलबुला फूटा। 

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