जीवन में संघर्ष
सोने की लंका पुष्पक विमान तो रावण के पास था,राम ने तो वनवास ही देखा ना
राजपाट तो कंस के पास था, जेल में तो कृष्ण ने ही जन्म लिया था ना राजमहल में तो कौरव रहते थे, वनवास तो पांडवों को ही भोगना पड़ा था ना
राहु केतु अमृत पीने के बाद भी राक्षस हैं और शिवजी विष पीने के बाद भी देवों के देव महादेव हैं
इसलिए तो हम शिव,राम कृष्ण को पूजते हैं, राहु केतु, रावण या कंस को नहीं
राहु केतु अमृत पीने के बाद भी राक्षस हैं और शिवजी विष पीने के बाद भी देवों के देव महादेव हैं
इसलिए तो हम शिव,राम कृष्ण को पूजते हैं, राहु केतु, रावण या कंस को नहीं
जब हमारे भगवान का जीवन सरल नहीं था तो हम तो मनुष्य हैं ! अगर हमारे जीवन में संघर्ष लिखा है तो हम साधारण भी नहीं है
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