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Showing posts from 2018

इंसान की अपनी कमाई हुई सबसे बड़ी दौलत

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व्यक्ति का अच्छा स्वभाव ही उसकी  खूबी है जो  सदा के लिये सभी का प्रिय बना देती है। कोई कितना भी किसी  से दूर रहे  पर उसके  स्वभाव के कारण  किसी न किसी पल यादों में आ ही जाता है ।  इसी लिए  कहा  जाता है कि स्वभाव ही इंसान की अपनी कमाई हुई सबसे बड़ी दौलत है।         वरना नोट बंदी तो कभी भी हो सकती है । 

ज़िन्दगी हर पल मौज़ है वरना समस्या तो सभी के साथ रोज है

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महाभारत में कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा "मेरी माँ ने मुझे जन्मते ही त्याग दिया, क्या ये मेरा अपराध था कि मेरा जन्म एक अवैध बच्चे के रूप में हुआ ? दोर्णाचार्य ने मुझे शिक्षा देने से मना कर दिया क्योंकि वो मुझे क्षत्रीय नही मानते थे, क्या ये मेरा कसूर था.. द्रौपदी के स्वयंवर में मुझे अपमानित किया गया, क्योंकि मुझे किसी राजघराने का कुलीन व्यक्ति नही समझा गया... श्री कृष्ण मंद मंद मुस्कुराते हुए बोले "कर्ण, मेरा जन्म जेल में हुआ था। मेरे पैदा होने से पहले मेरी मृत्यु मेरा इंतज़ार कर रही थी। जिस रात मेरा जन्म हुआ ...उसी रात मुझे मेरे माता-पिता से अलग होना पड़ा... मैने गायों को चराया और गोबर को उठाया। जब मैं चल भी नही पाता था.. तो मेरे ऊपर प्राणघातक हमले हुए। कोई सेना नही, कोई शिक्षा नही, कोई गुरुकुल नही, कोई महल नही, मेरे मामा ने मुझे अपना सबसे बड़ा शत्रु समझा। बड़े होने पर मुझे ऋषि सांदीपनि के आश्रम में जाने का अवसर मिला। मुझे बहुत से विवाह राजनैतिक कारणों से या उन स्त्रियों से करने पड़े ...जिन्हें मैंने राक्षसों से छुड़ाया था! जरासंध के प्रकोप के कारण मुझे अपने परिवार क...

जाने क्यों और कैसे ? प्रभु कहते है कि, मेरी कृपा सर्वोपरि है .....

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    एक व्यक्ति हमेशा ईश्वर के नाम का जाप किया करता था । धीरे धीरे वह काफी बुजुर्ग हो चला था इसीलिए एक कमरे मे ही पड़ा रहता था ।                        जब भी उसे शौच; स्नान आदि के लिये जाना होता था; वह अपने बेटो को आवाज लगाता था और बेटे ले जाते थे । धीरे धीरे कुछ दिन बाद बेटे कई बार आवाज लगाने के बाद भी कभी कभी आते और देर रात तो नहीं भी आते थे।इस दौरान वे कभी-कभी गंदे बिस्तर पर ही रात बिता दिया करते थे                       अब और ज्यादा बुढ़ापा होने के कारण उन्हें कम दिखाई देने लगा था एक दिन रात को निवृत्त होने के लिये जैसे ही उन्होंने आवाज लगायी, तुरन्त एक लड़का आता है और बडे ही कोमल स्पर्श के साथ उनको निवृत्त करवा कर बिस्तर पर लेटा जाता है । अब ये रोज का नियम हो गया ।                         एक रात उनको शक हो जाता है कि, पहले तो बेटों को रात में कई बार आवाज लगाने पर भी नह...

नरम दिल रखने का साहस ताकत है

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अगर आप  जीवन में परिवर्तन करना चाहते है तो किसी के बारे मे शिकायत किये बगैर एक दिन निकाल कर देखिये उससे होने वाले चमत्कार के बारे में स्वयं जान जायेंगे। इस कठोर दुनिया में नरम दिल रखना एक साहस का काम है , कमजोरी का  नहीं।  अपने आप पर भरोसा रखें। इस कठोर दुनिया में नरम दिल रखने का साहस ताकत है , कमजोरी नहीं।

सफलता पाने के कुछ मंत्र ......

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जीवन में सफलता धीरे धीरे  मिल रही है , इस बात से डरने की जरुरत  नहीं है क्योकि डरने की जरुरत तो उनको है जो भाग्य के इंतजार मे  अभी भी वही खड़े है। हर एक पल , हर एक क्षण का सही उपयोग करे।  सफलता पाने के कुछ मंत्र  ......  माला वाले नहीं अपनाने वाले १. आलोचन के  बजाय प्रोत्साहित करे। २. परखने के बजाय समझे। ३. प्रतीक्षा के बजाय  प्रारम्भ करें। जरूर आजमाए फायदा अवश्य मिलेगा।

लाइनें जिसमें छिपा जीवन का सार

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आज एक  कविता पर पढ़ी जिसकी लाइनें तो सिर्फ चार ही थी पर उसमे जीवन का सार छिपा हुआ था।  वो लाइनें इस प्रकार से थी  ..... चैन से जीने के लिए , चार रोटी और दो कपडे काफी है , पर , बेचैनी से जीने के लिए चार गाड़ी , दो बंगले और तीन फ्लेट भी कम है। आदमी सुनता है मनभर , सुनने के बाद प्रवचन देता है टन भर , पर खुद ग्रहण करता है कण भर। यही सत्य है पर इसे  कोई मानना नहीं चाहता।  ये जीवन तो उस बुलबुले  तरह है  कि हवा चली और बुलबुला फूटा। 

अनमोल जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाये

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हर इंसान किसी न किसी दुविधा में फंसा हुआ है।  किसी के पास कि इतना कुछ है जो  दिखा नहीं सकता और  किसी के पास इतना ही है जो किसी को बता नहीं सकता।  दोनों के दोनों दुविधा में अपना जीवन निकल देते है।  मनुष्य का जन्म जिस उद्देश्य के लिए हुआ होता है वह बिना किसी परिणाम के खत्म हो जाता है।  इसलिए इस अनमोल जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाये ताकि आपके जाने के बाद ये दुनिया आपके किये गए कार्य से आपको याद रखे।

बस एक वाणी ही कौआ और कोयल बना देती है।

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आप पर कोई व्यंग करता है या  आपको कोई भला बुरा कहता है तो आप बुरा न माने।  क्योकि ये व्यंग  करना या भला बुरा कहना असफल व्यक्तियों का सफल व्यक्तियों के सामने अपने आप को ऊँचा दिखने का हथियार है। हमेशा नम्र और मधुर बोले  ..... अंतर के लिए ये ही देख लीजिये कि कौआ किसी का क्या लेता है ? और कोयल किसी को क्या देती है ? बस एक वाणी ही दोनों को  ( कौआ और कोयल ) अलग - अलग  बना देती है।

अपना पुण्य ख़ाली कर दुसरो को देने के बजाय

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एक बार की बात है एक बहुत ही पुण्य व्यक्ति अपने परिवार सहित तीर्थ के लिए निकला .. कई कोस दूर जाने के बाद पूरे परिवार को प्यास लगने लगी , ज्येष्ठ का महीना था , आस पास कहीं पानी नहीं दिखाई पड़ रहा था ..  उसके बच्चे प्यास से ब्याकुल होने लगे .. समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे ... अपने साथ लेकर चलने वाला पानी भी समाप्त हो चुका था  एक समय ऐसा आया कि उसे भगवान से प्रार्थना करनी पड़ी कि हे प्रभु अब आप ही कुछ करो मालिक ... इतने में उसे कुछ दूर पर एक साधू तप करता हुआ नजर आया..  व्यक्ति ने उस साधू से जाकर अपनी समस्या बताई ... साधू बोले की यहाँ से एक कोस दूर उत्तर की दिशा में एक छोटी दरिया बहती है जाओ जाकर वहां से पानी की प्यास बुझा लो ... साधू की बात सुनकर उसे बड़ी प्रसन्नता हुयी और उसने साधू को धन्यवाद बोला .. पत्नी एवं बच्चो की स्थिति नाजुक होने के कारण वहीं रुकने के लिया बोला और खुद पानी लेने चला गया.. जब वो दरिया से पानी लेकर लौट रहा था तो उसे रास्ते में पांच व्यक्ति मिले जो अत्यंत प्यासे थे .. पुण्य आत्मा को उन पांचो व्यक्तियों की प्यास देखि नहीं गयी और अपना सारा पानी उ...

एक सोच ही इंसान को इंसान बनाती है

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 एक सोच ही इंसान को इंसान बनाती है वरना बिना सोच के तो इंसान  जानवर के सामान है। इसलिए हमेशा  एक सकारात्मक सोच के साथ  दिन की समाप्ति करे। आज आपने कितनी दिक्क़तो  का सामना किया इससे कुछ  फर्क नहीं पड़ता। क्योकि आज से बेहतर करने के लिए  कल आपके साथ है। इसलिए एक अच्छी सोच के साथ  अच्छा इंसान बनने की कोशिश करे।

ऊचाइयां

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हर इंसान को भी अपनी सफलता की उड़ान उड़ने का हक है। लेकिन उड़ान के समय ये  न भूले कि ये उचाई उसे कैसे और क्यों मिली है। एक पंछी रोज उड़ान भरता है लेकिन  वो उतना ही ऊँचा रहता है जिसमे वो सरलता से निचे आ सके क्योंकि आसमान  में बैठने की जगह नहीं होती। 

इन शान नहीं इंसान बनो

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 इंसान को न जाने ऐसा घमंड क्यों हो जाता है  कि जो चीज ( चाहे पैसा , कुर्सी या खूबसूरती ) उसके पास है वो किसी और के पास नहीं। ऐसा घमंड कुछ काम नहीं आता  ....  ये समझना है तो अपने पूर्वजो या उन व्यक्तियो की तस्वीर को उठा कर देख लो कि जो कभी आप जैसे हुआ करते थे , उनके साथ क्या गया ? सब कुछ यही रह गया। घमंड इस बात का करना चाहिए कि आपको इंसान के रूप में जन्म मिला है इस जीवन को उन लोगो की भी सहायता मे लगाओ जिनको आपकी जरुरत है , जिनके पास कुछ भी नहीं है। 

२४ कैरेट गोल्ड

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बुद्धि हम तीन तरीके से प्राप्त कर सकते है    १. चिन्तन से  ... जो सबसे उत्तम है  , २. दूसरों से सीखकर   .... जो ठीक है और आसान भी है  ,  और  ३. अनुभव  करके  ... जो सबसे कठिन रास्ता है।  अनुभव से प्राप्त बुध्दि उस स्वर्ण की तरह है जो सुनार ने गरम भट्टी में से तपाकर निकला है।  २४ कैरेट गोल्ड  .....

जरा संभल के .... तनाव एक तूफान

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आप स्वयं तनाव मे है तो इसका ये मतलब नहीं कि आप अपना तनाव किसी और को दे। जीवन मे कई बार ऐसे तूफान ( तनाव )  आएंगे मगर उस तूफान को अपने अंदर न घुसने दे तूफान का आना और आने के बाद उसका जाना .....  परिणाम हम सब जानते है इसलिए सहनशील और धैर्यवान बने।

सोच मे बदलाव

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हम अपने कई रिस्तो को टूटने से बचा सकते है  .... बस अपनी सोच मे  थोड़ा सा बदलाव करके   .... कि सामने वाला गलत नहीं है  ..... सिर्फ हमारी सोच से थोड़ा अलग है।

उत्तम समय कभी नहीं आता

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जिंदगी  को आसान बनाने के बजाए खुद को मजबूत  बनाना चाहिए   ...... ठीक उसी प्रकार उत्तम समय कभी नहीं आता बस उस समय को उत्तम बनाना चाहिए   ......

जीवन में संघर्ष

सोने की लंका  पुष्पक विमान तो रावण के पास था,राम ने तो वनवास ही देखा ना  राजपाट तो कंस के पास था, जेल में तो कृष्ण ने ही जन्म लिया था ना राजमहल में तो कौरव रहते थे, वनवास तो पांडवों को ही भोगना पड़ा था ना राहु केतु अमृत पीने के बाद भी राक्षस हैं और शिवजी विष पीने के बाद भी देवों के देव महादेव हैं इसलिए तो हम शिव,राम कृष्ण को पूजते हैं, राहु केतु, रावण या कंस को नहीं  जब हमारे भगवान का जीवन सरल नहीं था तो हम तो मनुष्य हैं ! अगर हमारे जीवन में संघर्ष लिखा है तो हम साधारण भी नहीं है          

आपकी आदतें ........

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मैं ये सोचता हुँ  कि  इंसान अपना भविष्य  नहीं बदल सकता   ... लेकिन अपनी आदते  जरूर बदल सकता है  ... और ये निश्चित है कि आपकी आदतें आपका भविष्य जरूर बदल देगी  ....

समय और जिंदगी

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जिंदगी आसान नहीं है          बस खुद को मजबूत बनाना पड़ता है  ..... उत्तम समय कभी नहीं आता         बस समय को उत्तम बनाना पड़ता है। 

ध्यान दे .....

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कभी किसी को कमजोर नहीं समझाना चाहिए क्योकि   ..... आंखे चाहे कितनी भी छोटी क्यों न हो उसमे भी सारा आसमा देखने की ताकत होती है  .....

एक अच्छा इंसान

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आप स्वयं एक अच्छे इंसान बने  ....... लेकिन यह साबित करने में अपना समय बर्बाद न करे   .... समय किसी का नहीं हैं  ... क्योकि एक समय था जब  मैं सोचता की अच्छा समय आएगा लेकिन समय निकलने के बाद में पता चला कि वो भी क्या समय था   ......

हमेशा सत्य ही बोले

सच्चे व्यक्ति को कभी कुछ  याद रखने जरुरत नहीं जो उसने कहा है   ..  लेकिन झूठे व्यक्ति को हर वो बात याद रखनी  जो उसने किसी को बोली है  ...... पता नहीं कब कोई क्या पूछ ले   ...  इसलिए हमेशा सत्य ही बोले 

कड़वा सत्य

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मुँह पर कड़वा बोलने वाले लोग कभी धोखा नहीं देते।  डरना तो मीठा बोलने वालो से चाहिए।  क्योकि आइना हमेशा सच्चाई दिखता है। 

कुछ विचार ..... इन्हे महसुस जरूर करें

हर इंसान को नमक की तरह होना चाहिये,जो भोजन में रहता है मगर  दिखाई  नहीं  देता,और अगर ना हो तो उसकी बहुत कमी महसूस होती है। सिलाई मशीन में धागा नहीं डालने पर वो चलती तो है,पर कुछ सिलती नहीं..उसी तरह, यदि रिश्तों में प्यार नहीं डालोगे,तो ज़िन्दगी चलेगी ज़रूर पर रिश्तों को जोड़ नहीं पाएगी।

एक सच्चाई

शुक्र है की मौत सभी को आती है  ..... वरना तो अमीर तो इस बात का भी मजाक उड़ाते कि गरीब था इस लिए मर गया   ....

जिम्मेदार नागरिक बने

कृष्ण ने एक सच्चाई बताई थी:-​__ ​ मरना सभी को है...​​लेकिन मरना कोई नहीं चाहता...​ आज परिस्थिति और  भी विषम हैं​ भोजन सभी को चाहिए लेकिन..​__​खेती करना कोई नहीं चाहता​ ​पानी सभी को चाहिए लेकिन..​__​पानी बचाना कोई नहीं चाहता..​ ​दूध सभी को चाहिए लेकिन ...​__​गाय पालना कोई नहीं चाहता...​ ​छाया सभी को चाहिए लेकिन...​__​पेड़ लगाना और उसे​ ​जिन्दा रखना कोई नहीं चाहता...​ ​बहु सभी को चाहिए पर...​__​बेटी बचाना कोई नहीं चाहता...​ ​मेसेज  पढ़कर वाह वाह करना सभी जानते हैं​  लेकिन जागरूकता फैलाने के लिए फॉरवर्ड करना कोई नहीं चाहता...​        जिम्मेदार नागरिक बने।

काश ये बीमारी सबको लग जाए

"नानी, मैं एक कुल्फी और ले लूं,प्लीज़..."चीकू ने फ्रिज खोलते हुए पूछा, "चीकू,तुम खा चुके हो ना?... गलत बात,वो कुल्फी नानी की है...हटो वहाँ से,"मैंने अपने ६ साल के बेटे को आँखे तरेरीं,लेकिन तब तक चीकू की नानी कुल्फी उसके हवाले कर चुकी थीं, "क्या माँ.., मैं खास आपके लिए तिवारी की कुल्फी लाई थी...ये तो खा चुका था ना।" "अरे बेटा,जब से घुटनों में दर्द बढ़ा है ना, डॉक्टर ने कुछ भी ठंडा खाने को मना कर दिया है।" मैंने सिर पकड़ लिया,माँ की वही पुरानी बीमारी, झूठ बोलने की...बचपन में हमेशा यही हुआ,बस माँ जान जाएं कि क्या हमें अच्छा लगा,और ये बीमारी उन्हें घेर लेती थी। "माँ,मटर पनीर और है क्या,बहुत अच्छी बनी है!" "हाँ, मेरी कटोरी से ले लो, मुझसे तो खाई ही नहीं जा रही,मिर्च बहुत है.." एक बार पापा कितने मन से गुलाबी लिपस्टिक लाए थे, बड़ी बुआ को भा गई और माँ का फिर वही नाटक, "अरे,रख लो जीजी... मुझे तो बड़ा खराब रंग लगता है ये," इसके बाद दो दिनों तक मैंने माँ से बात नहीं की थी, पापा ने समझाया,"बेटा,तुम्हारी माँ ...

हमारी पसंद

निष्ठावान कार्यकर्ता मतलब क्या ?? Ans: तेजपत्ता कोई भी सब्जी बनाते समय सबसे पहले उसे ही डाला जाता है और.. उसी सब्जी को खाते समय सबसे पहले उसे ही खींचकर बाहर फेंका जाता है !! चापलूस व्यक्ति  मतलब क्या ?? Ans: हरा धनिया कोई भी सब्जी बनाते समय सबसे बाद मे प्रस्तुत करने के समय डाला जाता है और.. फिर सब्जी के सारे स्वाद का श्रेय वही ले जाता है !!

प्रणाम का महत्व

    महाभारत का युद्ध चल रहा था  एक दिन दुर्योधन के व्यंग्य से आहत होकर "भीष्म पितामह" घोषणा कर देते     हैं कि    "मैं कल पांडवों का वध कर दूँगा" उनकी घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में बेचैनी बढ़ गई    भीष्म की क्षमताओं के बारे में सभी को पता था इसलिए सभी किसी अनिष्ट की आशंका से परेशान हो गए|       तब श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा अभी मेरे साथ चलो  श्रीकृष्ण द्रौपदी को लेकर सीधे भीष्म पितामह के शिविर में पहुँच गए  शिविर के बाहर खड़े होकर उन्होंने द्रोपदी से कहा कि - अन्दर जाकर पितामह को प्रणाम करो    द्रौपदी ने अन्दर जाकर पितामह भीष्म को प्रणाम किया तो उन्होंने" अखंड सौभाग्यवती भव " का आशीर्वाद दे दिया , फिर उन्होंने द्रोपदी से पूछा कि !  "वत्स, तुम इतनी रात में अकेली यहाँ कैसे आई हो, क्या तुमको श्रीकृष्ण यहाँ लेकर आये है" ?  तब द्रोपदी ने कहा कि "हां और वे कक्ष के बाहर खड़े हैं" तब भीष्म भी कक्ष के बाहर आ गए और दोनों ने एक दूसरे से प्रणाम किया  भीष्म ने कहा  "...

रिश्ते

क्या खूब कहा है ..... कि बहुत से रिश्ते इसलिए ख़त्म  हो जाते है  ...... क्योकि एक तो सही से बोल नहीं पाता और दूसरा सही से समझ नहीं पाता 

प्रतिभा शाली बनो

परीक्षा में पूछा गया निम्न गद्यांश का भावार्थ लिखो करोड़ो रुपयों की बैंको में से हेराफेरी हो गई पर डोरी से बांधी हुई पेन वही की वही रही। एक प्रतिभा शाली छात्र ने लिखा भावार्थ: लक्ष्मी की चोरी हो सकती है, परन्तु...सरस्वती की नहीं। इसलिए संतानों को शिक्षित बनाये, धनवान नहीं।

सच्ची उम्मीद

              एक बार एक आदमी रेगिस्तान में कहीं भटक गया। _उसके पास खाने-पीने की जो थोड़ी-बहुत चीजें थीं वो जल्द ही ख़त्म हो गयीं और पिछले दो दिनों से वो पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा था।_ वह मन ही मन जान चुका था कि अगले कुछ घंटों में अगर उसे कहीं से पानी नहीं मिला तो उसकी मौत पक्की है। _पर कहीं न कहें उसे ईश्वर पर यकीन था कि कुछ चमत्कार होगा और उसे पानी मिल जाएगा…_ तभी उसे एक झोपड़ी दिखाई दी! उसे अपनी आँखों यकीन नहीं हुआ.. _पहले भी वह मृगतृष्णा और भ्रम के कारण धोखा खा चुका था…पर बेचारे के पास यकीन करने के आलावा को चारा भी तो न था! आखिर ये उसकी आखिरी उम्मीद जो थी!_ वह अपनी बची-खुची ताकत से झोपडी की तरफ रेंगने लगा…जैसे-जैसे करीब पहुँचता उसकी उम्मीद बढती जाती… और इस बार भाग्य भी उसके साथ था, सचमुच वहां एक झोपड़ी थी ! _पर ये क्या? झोपडी तो वीरान पड़ी थी! मानो सालों से कोई वहां भटका न हो। फिर भी पानी की उम्मीद में आदमी झोपड़ी के अन्दर घुसा…_ अन्दर का नजारा देख उसे अपनी आँखों पे यकीन नहीं हुआ… _वहां एक हैण्ड पंप लगा था, आदमी एक नयी उर्जा से भर ...

हर हाल कैसा है

घमंड  बता देता है , कितना पैसा है। संस्कार बता देता है  , परिवार कैसा है। बोली बता देती है  , इंसान कैसा है। बहस बता देती है  , ज्ञान कैसा है। नज़रे बता देती है ,  सूरत कैसी  है। स्पर्श बता देता है  , नीयत कैसी है।

बस एक सोच का फ़र्क

मैं सब कुछ और तुम कुछ भी नहीं बस यही सोच इंसान को इंसान नहीं बनने देती।

संगत का असर

एक बार एक भंवरे की मित्रता एक गोबरी कीड़े के साथ हो गई , कीड़े ने भंवरे से कहा कि भाई  तुम मेरे सबसे अच्छे मित्र हो इस लिये मेरे यहाँ भोजन पर आओ . अब अगले दिन भंवरा सुबह सुबह तैयार हो गया और अपने बच्चो के साथ गोबरी कीड़े के यहाँ भोजन के लिये पहुँचा कीड़ा भी उन को देखकर बहुत खुश हुआ और सब का आदर करके भोजन परोसा . भोजन में गोबर की गोलियां परोसी गई और कीड़े ने कहा कि खाओ भाई रुक क्यों गए . भंवरा सोच में पड़ गया कि मैने बुरे का संग किया इस लिये मुझे तो गोबर खाना ही पड़ेगा . भंवरा ने सोचा की ये मुझे इस का संग करने से मिला और फल भी पाया अब इस को भी मेरे संग का फल मिलना चाहिये.... भंवरा बोला भाई आज तो में आप के यहाँ भोजन के लिये आया अब तुम कल मेरे यहाँ आओगे....अगले दिन कीड़ा तैयार होकर भंवरे के यहाँ पहुँचा , भँवरे  ने कीड़े को उठा कर गुलाब के फूल में बिठा दिया और रस पिलाया . कीड़े ने खूब फूलो का रस पिया और मज़े किये अपने मित्र का धन्यवाद किया और कहाँ मित्र तुम तो बहुत अच्छी जगह रहते हो और अच्छा खाते हो....इस के बाद कीड़े ने सोचा क्यों न अब में यहीं रहूँ और ये सोच कर यही फूल में बैठा...

माता पिता के बिना घर

माता  पिता के बिना घर कैसा होता है ? अगर इसकाअनुभव करना है तो...  एक दिन अपने अंगूठे के बिना  सिर्फ अपनी  उंगलियो से सारे काम करके देखो....  माता पिता की कीमत पता चल जाएगी ।

उम्मीद

      एक घर मे पांच दिए जल रहे थे , एक दिन पहले दिए ने कहा -  'इतना जलकर भी मेरी रोशनी की लोगो को कोई कदर नही है तो बेहतर यही होगा कि मैं बुझ जाऊं ' और वह दीया खुद को व्यर्थ समझ कर बुझ गया । जानते है वह दिया कौन था ?  वह दीया था उत्साह का प्रतीक ।        यह देख दूसरा दीया जो शांति का प्रतीक था , कहने लगा , मुझे भी बुझ जाना चाहिए...  निरंतर शांति की रोशनी देने के बावजूद भी लोग हिंसा कर रहे है और शांति का दीया बुझ गया ।         उत्साह और शांति के दीये बुझने के बाद , जो तीसरा दीया हिम्मत का था , वह भी अपनी हिम्मत खो बैठा और बुझ गया । उत्साह , शांति और अब हिम्मत के न रहने पर चौथे दीए ने बुझना ही उचित समझा । चौथा दीया समृद्धि का प्रतीक था । सभी दीए बुझने के बाद केवल पांचवां दीया अकेला ही जल रहा था । हालांकि पांचवां दीया सबसे छोटा था मगर फिर भी वह निरंतर जल रहा था । तब उस घर मे एक लड़के ने प्रवेश किया । उसने देखा कि उस घर मे सिर्फ एक ही दीया जल रहा है , वह खुशी से झूम उठा ... चार दीए ...

शिक्षा के मंदिर से व्यापार

शिक्षा का मंदिर ( स्कूल )  ....  अब एक बिज़नस सेण्टर बन गया हैं।हर मामले मे ..  आज सिर्फ पुस्तकों  को ही ले ले ..  जब पुस्तको  पर 60% कमीशन था  तब तक पुस्तको को  स्कूल से खरीदना जरुरी था  और अब            ( NCRT ) की पुस्तकों पर  जब कमीशन नहीं बनता तो पुस्तके बाहर से  मिलेगी।  आज मझे मेरी बच्च्ची की पुस्तक स्कूल से नहीं मिली।   वह रे हिंदुस्तान ये है हमारा शिक्षा का मंदिर ।

आओ पहल करें

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अगर  देखें तो किसी इंसान का जन्म अमीर  परिवार में तथा किसी का गरीब परिवार में ।कोई पढ़ा - लिखा तो  कोई अनपढ़ रह जाता है  ।मगर दोनों में ज्यादा कुछ अंतर नहीं है ।  एक ने अपना पूरा जीवन स्वार्थ के लिए इकठ्ठा करने में निकाल दिया और दूसरे ने कुछ पाने के स्वार्थ में निकाल दिया।  दुनिया ऐसे लोगो को याद  नहीं करती जो सिर्फ अपना स्वार्थ देखता हो। अपना स्वार्थ  तो चीटियाँ भी देखती तभी तो वो अपना  जीवन सिर्फ इकठ्ठा करने में निकाल देती हैं। होता क्या है ? बारिस आती हैं  और चीटियों का  इकठ्ठा किया हुआ सारा राशन बहा कर ले जाती है। तो इंसान को चाहिए कि ये उनका जीवन  यूं ही व्यर्थ न जाये  , इस जीवन को स्वयं के अलावा किसी अन्य जरुरतमंद के जीवन को उन्नत बनाने मे व्यतीत करे । इस प्रयास से उसका अपना तो कुछ नहीं बिगड़ेगा , मगर उस जरुरतमंद को  इतना विश्वास हो जायेगा कि  उसका जन्म  गरीब परिवार में जरूर  हुआ है , मगर उसकी सहायता लिए कोई साथ खड़ा है। हर इंसान द्वारा  ऐसा कर्म  कि...

माता-पिता के संस्कार

एकबोध कथा संस्कार क्या है.. एक राजा के पास सुन्दर घोडी थी । कई बार युद्व में इस घोडी ने राजा के प्राण बचाये और घोडी राजा के लिए पूरी वफादार थी,कुछ दिनों के बाद इस घोडी ने एक बच्चे को जन्म दिया, बच्चा काना पैदा हुआ, पर शरीर हष्ट पुष्ट व सुडौल था । बच्चा बडा हुआ, बच्चे ने मां से पूछा: मां मैं बहुत बलवान हूँ, पर काना हूँ.. यह कैसे हो गया, इस पर घोडी बोली: बेटा जब मैं  गर्भवती थी, तू पेट में था तब राजा ने मेरे उपर सवारी करते समय मुझे एक कोडा मार दिया, जिसके कारण तू काना हो गया । यह बात सुनकर बच्चे को राजा पर गुस्सा आया और मां से बोला: मां मैं इसका बदला लूंगा । मां ने कहा राजा ने हमारा पालन-पोषण किया है, तू जो स्वस्थ है.. सुन्दर है, उसी के पोषण से तो है, यदि राजा को एक बार गुस्सा आ गया तो इसका अर्थ यह नहीं है कि हम उसे क्षति पहुचायें, पर उस बच्चे के समझ में कुछ नहीं आया, उसने मन ही मन राजा से बदला लेने की सोच ली । एक दिन यह मौका घोडे को मिल गया राजा उसे युद्व पर ले गया । युद्व लडते-लडते राजा एक जगह घायल हो गया, घोडा उसे तुरन्त उठाकर वापिस महल ले आया । इस पर घोडे को ताज्जू...

अनमोल विचार

                 "घमंड" और "पेट"                  जब ये दोनों बढतें हैं..            तब "इन्सान" चाह कर भी         किसी को गले नहीं लगा सकता..              जिस प्रकार नींबू के रस की एक बूँद       हज़ारों लीटर दूध को बर्बाद कर देती है...                       ...उसी प्रकार...                    "मनुष्य का अहंकार"_                भी अच्छे से अच्छे संबंधों को                       बर्बाद कर देता है!!!                   "सत्कर्म ही जीवन है।"

सिक्के के दो पहलू

एक बार एक केकड़ा समुद्र किनारे अपनी मस्ती में चला जा रहा था और बीच बीच में रुक रुक कर अपने पैरों के निशान देख कर खुश होता । आगे बढ़ता पैरों के निशान देखता और खुश होता,,,,,इतने में एक लहर आयी और उसके पैरों के सब निशान मिट गये। इस पर केकड़े को बड़ा गुस्सा आया, उसने लहर से बोला , "ए लहर मैं तो तुझे अपना मित्र मानता था, पर ये तूने क्या किया ,मेरे बनाये सुंदर पैरों के निशानों को ही मिटा दिया कैसी दोस्त हो तुम ।" तब लहर बोली, " वो देखो पीछे से मछुआरे लोग पैरों के निशान देख कर ही तो केकड़ों को पकड़ रहे हैं,,, हे मित्र! तुमको वो पकड़ न लें , बस इसीलिए मैंने निशान मिटा दिए ! ये सुनकर केकड़े की आँखों में आँसू आ गये । सच यही है कई बार हम सामने वाले की बातों को समझ नहीं पाते और अपनी सोच अनुसार उसे गलत समझ लेते हैं। जबकि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। अतः मन में वैर लाने से बेहतर है कि हम सोच समझ कर निष्कर्ष निकालें !!

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

एक दिन की बात है लड़की की माँ खूब परेशान होकर अपने पति को बोली की एक तो हमारा एक समय का खाना पूरा नहीं होता और बेटी दिन ब दिन बड़ी होती जा रही है गरीबी की हालत में इसकी शादी कैसे करेंगे ? बाप भी विचार में पड़ गया दोनों ने दिल पर पत्थर रख कर एक फैसला किया की कल बेटी को मार कर गाड़ देंगे . दुसरे दिन का सूरज निकला , माँ ने लड़की को खूब लाड प्यार किया , अच्छे से नहलाया , बार - बार उसका सर चूमने लगी . यह सब देख कर लड़की बोली : माँ मुझे कही दूर भेज रहे हो क्या ? वर्ना आज तक आपने मुझे ऐसे कभी प्यार नहीं किया , माँ केवल चुप रही और रोने लगी , तभी उसका बाप हाथ में फावड़ा और चाकू लेकर आया , माँ ने लड़की को सीने से लगाकर बाप के साथ रवाना कर दिया . रास्ते में चलते - चलते बाप के पैर में कांटा चुभ गया , बाप एक दम से नीचे बैठ गया , बेटी से देखा नहीं गया उसने तुरंत कांटा निकालकर फटी चुनरी का एक हिस्सा पैर पर बांध दिया . बाप बेटी दोनों एक जंगल में पहुचे बाप ने फावड़ा लेकर एक गढ्ढा खोदने लगा बेटी सामने बैठे - बेठे देख रही थी , थोड़ी देर बाद गर्मी के कारण बाप को प...

जीवन के लिए खर्च” या “खर्च के लिए जीवन

पत्नी ने कहा --- आज धोने के लिए ज्यादा कपड़े मत निकालना। पति -- क्यों...?? पत्नी ने  कहा --- अपनी काम वाली बाई दो दिन नहीं आएगी। पति -- क्यों...?? पत्नी -- गणपति के लिए अपने नाती से मिलने बेटी के यहाँ जा रही है। पति -- ठीक है , अधिक कपड़े नहीं निकालता। पत्नी -- और हाँ , गणपति के लिए पाँच सौ रूपए दे दूँ उसे..?  त्यौहार का बोनस। पति -- क्यों.? अभी दिवाली आ ही रही है , तब दे देंगे। पत्नी -- अरे नहीं बाबा.! गरीब है बेचारी , बेटी-नाती के यहाँ जा रही है तो उसे भी अच्छा लगेगा और इस महँगाई के दौर में उसकी पगार से त्यौहार कैसे मनाएगी बेचारी.? पति -- तुम भी ना , जरूरत से ज्यादा ही भावुक हो जाती हो। पत्नी -- अरे नहीं , चिंता मत करो। मैं आज का पिज्जा खाने का कार्यक्रम रद्द कर देती हूँ। खामख्वाह पाँच सौ रूपए उड़ जाएँगे , बासी पाव के उन आठ टुकड़ों के पीछे। पति -- वा , वा… क्या कहने!! हमारे मुँह से पिज्जा छीनकर बाई की थाली में.! तीन दिन बाद पोंछा लगाती हुई कामवाली बाई से पति ने पूछा... पति -- क्या बाई.? , कैसी रही छुट्टी.? बाई -- बहुत बढ़िया हुई साहब , दीद...

Refresh your mind with game

Mind game...Solve this❓ Two words are jumbled up in each of the following items. If you find out one word, the other will be its opposite. Example:  TIOUN = IN x OUT 1. Golyrbi 2. Gondylou 3. WpnuOd 4. Naawmnom 5. Titlghfer 6. Egmooc 7. Ydignhat 8. Yyiannnurs 9. Mmweetrrinus 10. Ciiavelglyt Who is the  wordmaster?

Jivan ka satya

चिड़िय जब जीवित रहती है तब वो किड़े-मकोड़ों को खाती है और चिड़िया जब मर जाती है तब किड़े-मकोड़े उसको खा जाते है।

NAGATIVE- vs POSITIVE+ Way Of Thinking

👌 NEGATIVE- vs POSITIVE+     Way Of Thinking!                 एक महान लेखक अपने लेखन कक्ष में बैठा हुआ लिख रहा था। 1) पिछले साल मेरा आपरेशन हुआ और मेरा गालब्लाडर निकाल दिया गया। इस आपरेशन के कारण बहुत लंबे सम...