आओ पहल करें

अगर  देखें तो किसी इंसान का जन्म अमीर  परिवार में तथा किसी का गरीब परिवार में ।कोई पढ़ा - लिखा तो  कोई अनपढ़ रह जाता है  ।मगर दोनों में ज्यादा कुछ अंतर नहीं है ।  एक ने अपना पूरा जीवन स्वार्थ के लिए इकठ्ठा करने में निकाल दिया और दूसरे ने कुछ पाने के स्वार्थ में निकाल दिया।  दुनिया ऐसे लोगो को याद  नहीं करती जो सिर्फ अपना स्वार्थ देखता हो।अपना स्वार्थ  तो चीटियाँ भी देखती तभी तो वो अपना  जीवन सिर्फ इकठ्ठा करने में निकाल देती हैं। होता क्या है ? बारिस आती हैं  और चीटियों का  इकठ्ठा किया हुआ सारा राशन बहा कर ले जाती है। तो इंसान को चाहिए कि ये उनका जीवन  यूं ही व्यर्थ न जाये  , इस जीवन को स्वयं के अलावा किसी अन्य जरुरतमंद के जीवन को उन्नत बनाने मे व्यतीत करे । इस प्रयास से उसका अपना तो कुछ नहीं बिगड़ेगा , मगर उस जरुरतमंद को  इतना विश्वास हो जायेगा कि  उसका जन्म  गरीब परिवार में जरूर  हुआ है , मगर उसकी सहायता लिए कोई साथ खड़ा है। हर इंसान द्वारा  ऐसा कर्म  किया जाये की " इंसान भूखा उठे जरूर मगर भूखा सोए नहीं "।

जय भारत  

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Comments

  1. बहुत अच्छा लिखा है आपने , बिल्कुल सत्य

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