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Showing posts from April, 2018

प्रणाम का महत्व

    महाभारत का युद्ध चल रहा था  एक दिन दुर्योधन के व्यंग्य से आहत होकर "भीष्म पितामह" घोषणा कर देते     हैं कि    "मैं कल पांडवों का वध कर दूँगा" उनकी घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में बेचैनी बढ़ गई    भीष्म की क्षमताओं के बारे में सभी को पता था इसलिए सभी किसी अनिष्ट की आशंका से परेशान हो गए|       तब श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा अभी मेरे साथ चलो  श्रीकृष्ण द्रौपदी को लेकर सीधे भीष्म पितामह के शिविर में पहुँच गए  शिविर के बाहर खड़े होकर उन्होंने द्रोपदी से कहा कि - अन्दर जाकर पितामह को प्रणाम करो    द्रौपदी ने अन्दर जाकर पितामह भीष्म को प्रणाम किया तो उन्होंने" अखंड सौभाग्यवती भव " का आशीर्वाद दे दिया , फिर उन्होंने द्रोपदी से पूछा कि !  "वत्स, तुम इतनी रात में अकेली यहाँ कैसे आई हो, क्या तुमको श्रीकृष्ण यहाँ लेकर आये है" ?  तब द्रोपदी ने कहा कि "हां और वे कक्ष के बाहर खड़े हैं" तब भीष्म भी कक्ष के बाहर आ गए और दोनों ने एक दूसरे से प्रणाम किया  भीष्म ने कहा  "...

रिश्ते

क्या खूब कहा है ..... कि बहुत से रिश्ते इसलिए ख़त्म  हो जाते है  ...... क्योकि एक तो सही से बोल नहीं पाता और दूसरा सही से समझ नहीं पाता 

प्रतिभा शाली बनो

परीक्षा में पूछा गया निम्न गद्यांश का भावार्थ लिखो करोड़ो रुपयों की बैंको में से हेराफेरी हो गई पर डोरी से बांधी हुई पेन वही की वही रही। एक प्रतिभा शाली छात्र ने लिखा भावार्थ: लक्ष्मी की चोरी हो सकती है, परन्तु...सरस्वती की नहीं। इसलिए संतानों को शिक्षित बनाये, धनवान नहीं।

सच्ची उम्मीद

              एक बार एक आदमी रेगिस्तान में कहीं भटक गया। _उसके पास खाने-पीने की जो थोड़ी-बहुत चीजें थीं वो जल्द ही ख़त्म हो गयीं और पिछले दो दिनों से वो पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा था।_ वह मन ही मन जान चुका था कि अगले कुछ घंटों में अगर उसे कहीं से पानी नहीं मिला तो उसकी मौत पक्की है। _पर कहीं न कहें उसे ईश्वर पर यकीन था कि कुछ चमत्कार होगा और उसे पानी मिल जाएगा…_ तभी उसे एक झोपड़ी दिखाई दी! उसे अपनी आँखों यकीन नहीं हुआ.. _पहले भी वह मृगतृष्णा और भ्रम के कारण धोखा खा चुका था…पर बेचारे के पास यकीन करने के आलावा को चारा भी तो न था! आखिर ये उसकी आखिरी उम्मीद जो थी!_ वह अपनी बची-खुची ताकत से झोपडी की तरफ रेंगने लगा…जैसे-जैसे करीब पहुँचता उसकी उम्मीद बढती जाती… और इस बार भाग्य भी उसके साथ था, सचमुच वहां एक झोपड़ी थी ! _पर ये क्या? झोपडी तो वीरान पड़ी थी! मानो सालों से कोई वहां भटका न हो। फिर भी पानी की उम्मीद में आदमी झोपड़ी के अन्दर घुसा…_ अन्दर का नजारा देख उसे अपनी आँखों पे यकीन नहीं हुआ… _वहां एक हैण्ड पंप लगा था, आदमी एक नयी उर्जा से भर ...

हर हाल कैसा है

घमंड  बता देता है , कितना पैसा है। संस्कार बता देता है  , परिवार कैसा है। बोली बता देती है  , इंसान कैसा है। बहस बता देती है  , ज्ञान कैसा है। नज़रे बता देती है ,  सूरत कैसी  है। स्पर्श बता देता है  , नीयत कैसी है।

बस एक सोच का फ़र्क

मैं सब कुछ और तुम कुछ भी नहीं बस यही सोच इंसान को इंसान नहीं बनने देती।

संगत का असर

एक बार एक भंवरे की मित्रता एक गोबरी कीड़े के साथ हो गई , कीड़े ने भंवरे से कहा कि भाई  तुम मेरे सबसे अच्छे मित्र हो इस लिये मेरे यहाँ भोजन पर आओ . अब अगले दिन भंवरा सुबह सुबह तैयार हो गया और अपने बच्चो के साथ गोबरी कीड़े के यहाँ भोजन के लिये पहुँचा कीड़ा भी उन को देखकर बहुत खुश हुआ और सब का आदर करके भोजन परोसा . भोजन में गोबर की गोलियां परोसी गई और कीड़े ने कहा कि खाओ भाई रुक क्यों गए . भंवरा सोच में पड़ गया कि मैने बुरे का संग किया इस लिये मुझे तो गोबर खाना ही पड़ेगा . भंवरा ने सोचा की ये मुझे इस का संग करने से मिला और फल भी पाया अब इस को भी मेरे संग का फल मिलना चाहिये.... भंवरा बोला भाई आज तो में आप के यहाँ भोजन के लिये आया अब तुम कल मेरे यहाँ आओगे....अगले दिन कीड़ा तैयार होकर भंवरे के यहाँ पहुँचा , भँवरे  ने कीड़े को उठा कर गुलाब के फूल में बिठा दिया और रस पिलाया . कीड़े ने खूब फूलो का रस पिया और मज़े किये अपने मित्र का धन्यवाद किया और कहाँ मित्र तुम तो बहुत अच्छी जगह रहते हो और अच्छा खाते हो....इस के बाद कीड़े ने सोचा क्यों न अब में यहीं रहूँ और ये सोच कर यही फूल में बैठा...

माता पिता के बिना घर

माता  पिता के बिना घर कैसा होता है ? अगर इसकाअनुभव करना है तो...  एक दिन अपने अंगूठे के बिना  सिर्फ अपनी  उंगलियो से सारे काम करके देखो....  माता पिता की कीमत पता चल जाएगी ।

उम्मीद

      एक घर मे पांच दिए जल रहे थे , एक दिन पहले दिए ने कहा -  'इतना जलकर भी मेरी रोशनी की लोगो को कोई कदर नही है तो बेहतर यही होगा कि मैं बुझ जाऊं ' और वह दीया खुद को व्यर्थ समझ कर बुझ गया । जानते है वह दिया कौन था ?  वह दीया था उत्साह का प्रतीक ।        यह देख दूसरा दीया जो शांति का प्रतीक था , कहने लगा , मुझे भी बुझ जाना चाहिए...  निरंतर शांति की रोशनी देने के बावजूद भी लोग हिंसा कर रहे है और शांति का दीया बुझ गया ।         उत्साह और शांति के दीये बुझने के बाद , जो तीसरा दीया हिम्मत का था , वह भी अपनी हिम्मत खो बैठा और बुझ गया । उत्साह , शांति और अब हिम्मत के न रहने पर चौथे दीए ने बुझना ही उचित समझा । चौथा दीया समृद्धि का प्रतीक था । सभी दीए बुझने के बाद केवल पांचवां दीया अकेला ही जल रहा था । हालांकि पांचवां दीया सबसे छोटा था मगर फिर भी वह निरंतर जल रहा था । तब उस घर मे एक लड़के ने प्रवेश किया । उसने देखा कि उस घर मे सिर्फ एक ही दीया जल रहा है , वह खुशी से झूम उठा ... चार दीए ...