प्रणाम का महत्व
महाभारत का युद्ध चल रहा था एक दिन दुर्योधन के व्यंग्य से आहत होकर "भीष्म पितामह" घोषणा कर देते हैं कि "मैं कल पांडवों का वध कर दूँगा" उनकी घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में बेचैनी बढ़ गई भीष्म की क्षमताओं के बारे में सभी को पता था इसलिए सभी किसी अनिष्ट की आशंका से परेशान हो गए| तब श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा अभी मेरे साथ चलो श्रीकृष्ण द्रौपदी को लेकर सीधे भीष्म पितामह के शिविर में पहुँच गए शिविर के बाहर खड़े होकर उन्होंने द्रोपदी से कहा कि - अन्दर जाकर पितामह को प्रणाम करो द्रौपदी ने अन्दर जाकर पितामह भीष्म को प्रणाम किया तो उन्होंने" अखंड सौभाग्यवती भव " का आशीर्वाद दे दिया , फिर उन्होंने द्रोपदी से पूछा कि ! "वत्स, तुम इतनी रात में अकेली यहाँ कैसे आई हो, क्या तुमको श्रीकृष्ण यहाँ लेकर आये है" ? तब द्रोपदी ने कहा कि "हां और वे कक्ष के बाहर खड़े हैं" तब भीष्म भी कक्ष के बाहर आ गए और दोनों ने एक दूसरे से प्रणाम किया भीष्म ने कहा "...